कार्यक्रम और योजनाएं

छत्तीसगढ़ महिला कोष

पद नाम / पता
पदेन अध्यक्ष श्रीमती रमशीला साहू
कार्यालय - एम २,१ महानदी भवन ,मंत्रालय ,नया रायपुर ,
दूरभाष - +91-771-2221201
पदेन कार्यपालक निदेशक डॉ. एम.गीता(IAS)
कार्यालय - S0-10, भूतल,महानदी भवन, मंत्रालय, नया रायपुर
दूरभाष - +91-771-2510185
महाप्रबंधक श्रीमती हेमलता मिश्रा उपसंचालक महिला एवं बाल विकास विभाग
कार्यालय - पुराना नर्सेस हॉस्टल डी के एस भवन के पीछे रायपुर,
दूरभाष - +91-771-2420056,2420056

छत्तीसगढ़ राज्य में निवासरत महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से विकास संबंधी कार्यो को बढ़ावा देने हेतु छ.ग.महिला कोष का गठन छत्तीसगढ़ सोसायटीज रजिस्ट््रीकरण अधिनियम 1973 के तहत दिनांक 02.02.2002 में किया गया है । छ.ग.महिला कोष (शासी बोर्ड) की पदेन अध्यक्ष विभागीय मंत्री माननीया श्रीमती रमशीला साहू छ.ग.शासन महिला एवं बाल विकास विभाग है एवं संबंधित प्रमुख विभागों के सचिव शासी बोर्ड के अंतर्गत शासकीय सदस्य एवं दो अशासकीय सदस्य एन.जी.ओ. सम्मिलित है । छ.ग.महिला कोष के पदेन कार्यपालक निदेशक सचिव छ.ग. शासन महिला एवं बाल विकास विभाग है । छत्तीसगढ़ महिला कोष में वित्त समिति भी गठित है जिनके अध्यक्ष विभागीय सचिव डाॅं.एम.गीता छ.ग.शासन महिला एवं बाल विकास विभाग है |

कोष के लक्ष्य एवं उद्देश्य निम्नानुसार है -

  1. महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिये ऐसी गतिविधियों का संचालन करना/करवाना जिससे महिला/महिला समूहों को वित्त पोषण, प्रशिक्षण तथा अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो सके एवं वे आर्थिक रूप से स्वावलंबी होकर अपना एवं परिवार का जीवन यापन कर सके ।
  2. निम्नलिखित प्रयोजनों के लिये महिलाओं को ऋण/आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने की योजनाओं का संवर्धन, पोषण और उनमें सहायता देना । जैसे -
  • उनके मौजूदा रोजगार को बनाए रखना/बढ़ावा देना ।
  • नियोजन के और अधिक अवसर उत्पन्न करने के लिये उपयुक्त वातावरण का निर्माण ।
  • परिसम्पत्ति सृजन ।
  • पूंजी परिशोधन, तथा
  • आकस्मिक ऋण की जरूरतों को पूरा करने के लिये प्रबंध करना ।
  1. आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तथा महिला सशक्तिकरण के लिये महिला समूहों के गठन में पहल तथा सहभागिता ।
  2. निर्धन महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिये अवसर/सेवाऐं उपलब्ध कराना तथा नवीन प्रयोगो को बढ़ावा देना ।
  3. विद्यमान शासकीय तंत्र को संवेदनशील एवं महिला उन्मुख बनाना तथा वित्तीय संस्थाओं तक महिलाओं की पहुच/उनमें भागीदारी सुनिश्चित करना ।
  4. ऋण और उसके उचित प्रबंधन, ऋण पद्धतियों का विकास/प्रसार तथा महिलाओं के सामाजिक आर्थिक एवं मानसिक विकास हेतु अनुसंधान, अध्ययन, विश्लेषण करना/कराना ।
  5. महिला संगठनों/संस्थाओं/स्वयं सहायता समूहों के बीच आपसी सहयोग के तंत्र को प्रोत्साहित करना, उनके बीच अनुभव तथा जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना ताकि उनमें अपनी समस्याओं के निवारण हेतु सामूहिक प्रयास का कौशल विकसित किया जा सके ।
  6. महिलाओें में उद्यमिता को बढ़ावा देना । इस हेतु आवश्यक प्रशिक्षण, मार्गदर्शन एवं सुविधायें उपलब्ध कराने की व्यवस्था करना ।
  7. महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम/योजनाओं के क्रियान्वयन में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, ऋण संस्थाओं, औद्योगिक और वाणिज्यिक संगठनों, अशासकीय स्वयंसेवी संस्थाओं तथा अन्य संगठनों और निकायों के साथ समन्वय/सहयोग करना और उनका सहयोग प्राप्त करना ।
  8. कोष के उद्देश्यों और लक्ष्यों के अनुरूप शर्तो पर अनुदान, अंशदान, दान, ऋण, गारन्टी, उपहार, इत्यादि प्राप्त करना ।
  9. कोष के लक्ष्य एवं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए विधि सम्मत ऐसी सभी कार्यवाही करना जो सहायक अथवा आवश्यक हों ।
  10. शासकीय व अर्द्ध शासकीय संस्थाओं के लिये परामर्श सेवाओं को उपलब्ध कराना(विभिन्न कार्य जैसे किसी परियोजना का कार्यान्वित करना, मार्गदर्शन देना, अनुश्रवण तथा मूल्यांकन एवं अध्ययन करना, प्रशिक्षण आयोजित करना) एवं महिलाओं तथा बालकों से संबंधित राज्य सरकार, भारत सरकार की योजनाऐं कार्यान्वित करना ।
  11. अंतर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय संस्थानों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सम्पोषित/संचालित महिलाओं के विकास के कार्यक्रमों/योजनाओं/परियोजनाओं को कार्यान्वित करना कार्यान्वयन में सहयोग करना ।
  12. संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग को छ.ग.महिला कोष से आवश्यक जानकारी, मार्गदर्शन एवं सहायता प्राप्त करने का अधिकार होगा।
  13. कोष ऐसे सभी अतिरिक्त कार्य जो कि समय≤ पर उसे शासन द्वारा सौंपे जावे उसका निर्वहन करेगा ।

छत्तीसगढ़ महिला कोष की ऋण योजना -
छत्तीसगढ़ महिला कोष द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों को आसान शर्तो पर ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 15 अगस्त 2003 से इस योजना का संचालन किया जा रहा है । इस योजना के अंतर्गत महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रथम बार 50 हजार रूपये तक का ऋण प्रदाय किया जाता है एवं सफलतापूर्वक वापसी पर द्वितीय बार में रूपये 2.00 लाख रूपये तक का ऋण प्रदाय किया जाता है । ऋण की वसूली आसान 24/36 मासिक किश्तों में 27 एवं 39 माह में की जायेगी ।
महिला स्व-सहायता समूहों को 3 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज दर पर ऋण प्रदाय किया जाता है । वित्तीय वर्ष 2016-17 में (माह-अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक) लगभग 2541 स्वयं सहायता समूहों को राशि रूपये 930.30 लाख का ऋण उपलब्ध कराया गया है । योजना प्रारंभ से 31 मार्च 2017 तक लगभग 32407 स्वयं सहायता समूहों को राशि रूपये 6696.40 लाख का ऋण उपलब्ध कराया गया है ।
छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना -
महिला स्व-सहायता समूहों को 3 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज दर पर ऋण प्रदाय किया जाता है । वित्तीय वर्ष 2016-17 में (माह-अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक) लगभग 2541 स्वयं सहायता समूहों को राशि रूपये 930.30 लाख का ऋण उपलब्ध कराया गया है । योजना प्रारंभ से 31 मार्च 2017 तक लगभग 32407 स्वयं सहायता समूहों को राशि रूपये 6696.40 लाख का ऋण उपलब्ध कराया गया है ।

पात्रता :-

  1. सक्षम योजना के अंतर्गत ऐसी महिलाए पात्र है जो 18 से 50 वर्ष के आयु वर्ग की विधवा/कानूनी तौर पर तलाकशुदा व 35 से 45 आयु वर्ग की अविवाहित महिला । ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को योजना का लाभ मिल सके, के उद्देश्य से शासी बोर्ड की बैठक दिनांक 10.06.2015 में लिये गये निर्णय के अनुसार पूर्व नियम में आंशिक परिवर्तन लाते हुए सामाजिक तौर से तलाकशुदा महिलाओं को भी नोटरी द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र के आधार पर योजना का लाभ लेने हेतु पात्र रहेगी ।
  2. गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाली या वार्षिक रूपये 48000/- (अड़तालीस हजार) से कम आय परिवार की उक्तानुसार महिला पात्र होगी । योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद महिलाओं को मिल सके, के उद्देश्य से शासी बोर्ड की बैठक दिनांक 10.06.2015 में लिये गये निर्णय के अनुसार जिन महिलाओं की वार्षिक आय राशि रूपये 70000/- (सत्तर हजार) हो वे भी इस योजना के लाभ लेने हेतु पात्र रहेगी ।

योजना के अंतर्गत हितग्राही को अपना लघु व्यवसाय आरंभ करने के लिए 1.00 लाख रूपये तक का ऋण 6.5 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाता है । प्रदायित ऋण की वापसी 5 वर्ष में की जा सकती है । ऋण की वसूली ऋण प्रदायित तिथि से 6 माह के उपरांत प्रारंभ होती है । ऋण की स्वीकृति के अधिकार जिला स्तर पर प्रदान किये गये है । वित्तीय वर्ष में (माह-अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक) लगभग 407 महिलाओं को राशि रूपये 244.85 लाख का ऋण वितरित किया गया है । योजना प्रारंभ से 31 मार्च 2017 तक लगभग 1761 महिलाओं को राशि रूपये 1048.85 लाख का ऋण सक्षम योजनांतर्गत उपलब्ध कराकर महिलाओं को लाभांवित कराया गया है ।
छत्तीसगढ़ महिला कोष की स्वावलंबन योजना -
छत्तीसगढ़ महिला कोष द्वारा वर्ष 2009-10 में ‘‘स्वावलंबन योजना'' आरंभ की गई है । इस योजना के अंतर्गत ऐसी महिलायें जो कि संकटग्रस्त परिस्थितियों में जीवन-यापन कर रहीं हैं, उन्हें व्यवसायिक दक्षता प्रदान कर उनके स्वावलंबी बनने का आधार तैयार करना है एवं आय उपार्जन का प्रशिक्षण देकर उन्हें साम्थ्र्यवान बनाना है जिससे वे अपने एवं परिवार के सदस्यों का लालन-पालन, भरण-पोषण कर सकें । योजना का क्रियान्वयन करने का अधिकार जिला स्तर पर दिये गये है ।
पात्रता -

  1. स्वावलंबन योजना के अंतर्गत ऐसी महिलाएॅं पात्र है जो 18 से 50 वर्ष के आयु वर्ग की विधवा/कानूनी तौर पर तलाकशुदा व 35 से 45 आयु वर्ग की अविवाहित महिला ।
  2. गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाली जिनकी वार्षिक रूपये 48000/- (अड़तालीस हजार) से कम हो, आय वाले परिवार की उक्तानुसार महिला पात्र थी । योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद महिलाओं को मिल सके, के उद्देश्य से शासी बोर्ड की बैठक दिनांक 10.06.2015 में लिये गये निर्णय के अनुसार छ.ग.महिला कोष के विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कौशल उन्नयन योजना एवं उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम को स्वावलंबन योजना(लोक सेवा गारंटी योजना 2011) में समाहित करते हुए स्वावलंबन योजना की पात्रता में परिवर्तन किया गया है । पूर्व पात्रतानुसार 18-50 वर्ष तक की विधवा/कानूनतीतौर पर तलाकशुदा व 35 से 45 वर्ग की अविवाहित महिलायें जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली या जिनकी वाषिर्क आय 48000/- (शब्दों में राशि रूपये अड़तालीस हजार मात्र) से कम आय वाले परिवार की महिला पात्र थी । बोर्ड बैठक दिनांक 10.06.2015 में लिये गये निर्णयानुसार पात्रता में परिवर्तन करते हुए समस्त प्रशिक्षण मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना अंतर्गत व्ही.टी.पी. के माध्यम से दिये जावेगें । कौशल प्रशिक्षण हेतु प्रत्येक जिले से 20 महिलाओं का चयन कर जिला कौशल विकास प्राधिकरण में पदस्थ सहायक संचालक से समन्वय कर कलेक्टर के अनुमोदन से प्रशिक्षण प्रारंभ किये जावेगें । ऐसी वे सभी जरूरतमंद महिलायें जिनकी उम्र 18 से 50 वर्ष तक पूर्व पात्रतानुसार हो एवं जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय 70,000/- (शब्दों में सतर हजार रूपये मात्र) अंतर्गत हो, इस योजना का लाभ लेने हेतु पात्र रहेगी । परिस्थितियों को देखते हुए विधवा, तलाकशुदा एवं अविवाहित महिलाओं को प्राथमिकता दिया जाए उक्त महिलाएॅं उपलब्ध नहीं होने पर ऐसी जरूरतमंद सामान्य वर्ग की महिलाएॅं जिनके परिवार की वार्षिक आय 70,000/-(शब्दों में सतर हजार रूपये मात्र) रूपये से कम है, इस योजना का लाभ दिया जा सकता है।

वित्तीय वर्ष 2016-17 में (माह-अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक) लगभग 542 महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है । योजना प्रारंभ से 31 मार्च 2017 तक लगभग 1565 महिलाओं को राशि रूपये 31.73 लाख का प्रशिक्षण स्वावलंबन योजनांतर्गत उपलब्ध कराकर महिलाओं को लाभांवित कराया गया है ।
यौन व्यापार में संलिप्त महिलाओं एवं एच.आई.व्ही.पीड़ित महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने बाबत:-
सर्वोच्च न्यायालय में प्रचलित याचिका क्रमांक 135/2010 तथा इस संबंध में सचिव छ.ग.शासन महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रस्ताव, यौन व्यापार में संलिप्त महिलाओं के यौन व्यापार से बाहर लाने तथा समाज में सम्मान के साथ जीने का हक प्रदान करने हेतु महिलाओं को जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग की अनुशंसा पर 10 हजार रूपये व्यक्तिगत ऋण राशि 3 प्रतिशत साधारण ब्याज दर पर नियमानुसार उपलब्ध कराया जावे तथा इन महिलाओं द्वारा स्व-सहायता समूह गठन किया जाता है तो 1.00 लाख रूपये तक की ऋण राशि समूह को 3 प्रतिशत साधारण ब्याज दर पर जिला प्रबंधक द्वारा छत्तीसगढ़ महिला कोष अंतर्गत पात्रतानुसार उपलब्ध कराई जायेगी। महिला बाल विकास विभाग के इस प्रस्ताव का शासी बोर्ड द्वारा इस शर्त पर अनुमोदन किया जाता है कि संबंधित हितग्राही का नाम एवं पता सार्वजनिक नहीं किया जाये।

सूचना पट्ट