छत्तीसगढ राज्य महिला आयोग

अध्यक्ष सदस्य सचिव सदस्य
श्रीमती अनिला भेड़िया
कार्यालय- गायत्री भवन-13,
जल विहार कालोनी, रायपुर
दूरभाष - +91-771-4267996, 4023996
फैक्स - +91-771-4241416
 
श्री अभय देवांगन श्रीमती खिलेशवरी किरण
 

प्रदेश में महिलाओं को सशक्त बनाने, महिलाओं के हितों की देखभाल व उनका संरक्षण करने, महिलाओं के प्रति भेदभाव मूलक व्यवस्था, स्थिति और प्रावधानों को समाप्त करने हेतु पहल कर उनकी गरिमा व सम्मान सुनिश्चित करने, हर क्षेत्र में उन्हें विकास के समान अवसर दिलाने, महिलाओं पर होने वाले अत्याचार, अपराधों पर त्वरित कार्यवाही करने के लिए प्रदेश में राज्य महिला आयोग का गठन दिनांक 24.3.2001 को किया गया है ।

आयोग का कार्यः-

  • महिलाओं के लिए संविधान तथा अन्य विधियों के अधीन उपबंधित संरक्षणों से संबंधित समस्त मामलों का अन्वेषण तथा परीक्षण करना ।
  • राज्य सरकार को वार्षिक रूप से तथा ऐसे अन्य समयों पर, जैसा कि आयोग उचित समझे, ऐसे संरक्षणों के कार्यान्वयन के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करना ।
  • संविधान तथा अन्य विधियों में महिलाओं के संबंध में किए गए उपबंधों के उल्लघंन के मामलों को समुचित प्राधिकारियों तक ले जाना ।
  • महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना तैयार करने संबंधी प्रक्रिया में भाग लेना तथा सलाह देना ।
  • ऐसे मुकदमों को धन देना, जिनमें ऐसे मुद्दे अन्तर्वलित है जो महिलाओं के बड़े समूह पर प्रभाव डालते है ।

निम्नलिखित के संबंध में गहन अध्ययन करना:-

  • राज्य की महिलाओं की आर्थिक, शैक्षणिक तथा स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, इसमें विशिष्टतया आदिवासी जिलों तथा ऐसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो महिलाओं की साक्षरता, मृत्यु दर तथा आर्थिक विकास की दृष्टि से कम विकसित है ।
  • वे परिस्थितियां जिनमें महिलाएं कारखानों, स्थापनाओं, निर्माण स्थलों तथा वैसी ही अन्य स्थितियों में कार्य करती है और उक्त क्षेत्रों में महिलाओं की परिस्थिति में सुधार हेतु विशिष्ट रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार को सिफारिश करना ।
  • राज्य में या चुने हुए क्षेत्रों में, महिलाओं के विरूद्ध उन समस्त अपराधों की, जिनके अंतर्गत महिलाओं के विवाह तथा दहेज, बलात्कार, अपहरण, छेड़छाड़, महिलाओं के अनैतिक व्यापार से संबंधित मामले तथा प्रसव करवाने या नसबंदी करवाने के समय चिकित्सीय उपेक्षा, गर्भधारण या शिशु जन्म से संबंधित चिकित्सीय हस्तक्षेप के मामलों में समय-समय पर जानकारी संकलित करना ।
  • महिलाओं के प्रति अत्याचारों के विरूद्ध संपूर्ण राज्य में या विर्निदिष्ट क्षेत्रों में लोकमत जुटाने के लिए राज्य प्रकोष्ठ और जिला प्रकोष्ठों, यदि कोई हों, के साथ समन्वय करना जिससे ऐसे अत्याचारों संबंधी अपराध की शीघ्र रिपोर्ट की जाने तथा पता लगाये जाने और ऐसे अपराधों के विरूद्ध लोकमत जुटाने में सहायता मिलेगी ।

निम्नलिखित से संबंधित शिकायतें प्राप्त करना:-

  1. महिलाओं पर अत्याचार और महिलाओं के विरूद्ध अपराध ।
  2. रमहिलाओं को उनके न्यूनतम मजदूरी, प्राथमिक स्वास्थ्य और प्रसूति सुविधाओं से संबंधित अधिकारों से वंचित करना ।
  3. महिलाओं के संबंध में, राज्य सरकार के नीतिगत विनिश्चयों का पालन न किया जाना ।
  4. परित्यक्ता और निराश्रित महिलाओं और वैश्यावृत्ति करने के लिए विवश की गई महिलाओं का पुनर्वास ।

* ऐसी महिलाओं पर जो अभिरक्षा में है, अत्याचार और उन्हें समुचित उपचारी उपाय के लिए संबद्ध प्राधिकारियों तक ले जाना ।
निर्धन महिलाओं को विधिक परामर्श देने और ऐसी महिलाओं को विधिक सहायता प्राप्त करने में समर्थ बनाने के लिए राज्य के गैर सरकारी संगठनों को सहायता करना, प्रशिक्षित करना और प्रेरित करना ।
किसी जेल, प्रतिप्रेषण गृह महिलाओं की संस्था या अभिरक्षा में रखने के अन्य स्थान का, जहां महिलाओं को कैदियों के रूप में या अन्यथा रखा जाता है, निरीक्षण करना या निरीक्षण करवाना और यदि आवश्यक समझा जाए तो उपचारी कार्यवाही के लिए संबंद्ध प्राधिकारियों तक ले जाना ।
किसी अन्य ऐसे मामले के संबंध में कृत्यों का पालन करना जो कि राज्य सरकार द्वारा उसे निर्दिष्ट किया जाए ।

सूचना पट्ट